
छोटी उम्र में पिरियडस(Periods) होना अब एक आम सी बात हो गई है लेकिन क्या आप विश्वास करेंगे की ये अब सिर्फ शारीरिक बदलाव तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र में पिरियडस अब मानसिक तनाव की वजह भी बनता जा रहा है। जी हां दरअसल हाल ही में दून मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि छोटी उम्र में होने वाली पीरियड्स(menstruation) से बच्चियों में एंग्जायटी, डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन इसकी असल वजह क्या है? आखिर क्यों किशोरियों में छोटी उम्र में ही महावारी होने लगी है? चलिए इन सभी सवालों के जवाब इस आर्टिकल में जान लेते है।
क्यों हो रहे है कम उम्र में बच्चियों को पिरियड्स?
एक वक्त में किशोरियों में पीरियड्स 13-15 साल की उम्र में शुरु होती थी लेकिन अब 8-9 साल की छोटी बच्चियों को तक पिरियडस होने शुरू हो गए हैं। विशेषज्ञों डॉक्टरों के मुताबिक बदलता खानपान, निष्क्रिय जीवनशैली आदि इसकी मुख्य वजह हैं।
खानपान में जंक फूड और पैक्ड फूड के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से किशोरियों में हॉर्मोनल डिसबैलेंस हो रहा है।
इसके अलावा मोबाइल, टीवी और कम physical activities की वजह से भी किशोरियों के शरीर में बदलाव तेजी से हो रहे हैं।
क्या है कम उम्र में पिरियडस होने का कारण?
डॉक्टर्स के मुताबिक उन्होंने पिछले सात से आठ सालों में कई ऐसे मामले देखे हैं। जहां आठ से नौ साल की बालिकाओं को पीरियड्स शुरू हो गई। जिसकी वजह खराब खानपान के साथ शारीरिक गतिविधियों की कमी भी है। इससे hormonal changes तेजी से हो रहे हैं जिसका रिजल्ट छोटी बच्चियों में पिरियडस का कम उम्र में आना है।
पिरियडस से हो सकता है मानसिक तनाव
डॉक्टर्स कि मानें तो कम उम्र में पिडियडस आने से किशोरियां घबरा जाती हैं। वो इसके लिए तैयार नहीं होती यही बदलाव उनके लिए तनाव, चिंता और अवसाद की वजह बनता है। मनोचिकित्सक डॉक्टर्स के मुताबिक पीरियड्स के दौरान सभी बालिकाएं सामाजिक और मानसिक तनाव से गुजरती हैं। इस बारे में खुलकर बात न हो पाने की वजह से कई किशोरियां स्कूल जाने से भी बचती हैं।
पीरियड्स के दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों को समझने और संभालने में किशोरियां असमर्थ होती हैं। इस वजह से उनमें मानसिक तनाव बढ़ता है। साथ ही बालिकाएं अपने शारीरिक बदलावों को लेकर सचेत होने लगती हैं। जिस वजह से उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता है। इस दौरान शरीर में चेंजेस होना भी शुरु होते हैं लेकिन emotionally और mentally mature न होने की वजह से ये किशोरियों में Anxiety, stress, और depression का रूप ले लेता है।
Infection का भी खतरा
जानकारों की माने तो कई बच्चियां इस दौरान इतनी परेशान हो जाती हैं की वो अकेले रहने लगती हैं और इस बारे में अपने घर वालों से तक बात करने में तक कतराती हैं। जिस वजह से उन्हें साफ सफाई की जानकारी भी नहीं हो पाती और इससे उनके अंदर Infection का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही सही nutrition ना मिलने की वजह से किशोरियों के अंदर कमजोरी के साथ ही कई और स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
पिडियड्स के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
- बच्चों की lifestyle को सक्रिय हो
- बच्चे जंक फूड और पैक्ड फूड कम से कम खाएं और प्रोटीनयुक्त खाने को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
- पीरियड्स और उससे जुड़ी चीजों के बारे में अपने बच्चों को जरूर बताएं।
- स्कूल में मेंस्टुअल साइकिल, सेक्स और एडोलसेंट एजुकेशन को अनिवार्य रूप से सैलेबस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
- इंटीमेट हाइजीन का पूरी तरह से ध्यान रखें।
छोटी उम्र में माहवारी होना एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन सही जानकारी और जागरूकता से इसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। अगर आपको ये वीडियो उपयोगी लगा हो, तो इसे लाइक करें और इसे अपनी फिमेल फ्रेंडस और फेमीलि मेंबर्स के साथ भी शेयर करें ताकि वो इसे लेकर अवेयर हों और ऐसे वक्त में अपने घर की किशोरियों का सपोर्ट बन पाएं