
विधानसभा सत्र 2025 में ‘पहाड़ी’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि प्रदेशभर में प्रेमचंद अग्रवाल का चौतरफा विरोध शुरू हो गया. विपक्ष ने तो मुद्दे को घेरा ही आमजनता में भी अग्रवाल को लेकर आक्रोश था. आमजनता ने अग्रवाल का पुतला फूंक पर अपना विरोध जताया. नतीजा ये रहा कि अग्रवाल को रविवार को अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.
प्रेमचंद अग्रवाल को क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
प्रेमचंद अग्रवाल बजट सत्र के दौरान सदन में किसी सवाल का जवाब दे रहे थे, इस दौरान विपक्ष की ओर से ‘पहाड़ी’ शब्द को इस्तेमाल करते हुए मंत्री पर तंज कसा गया. जिसके बाद अग्रवाल का पारा चढ़ गया. आरोप है कि इस दौरान मंत्री ने पहाड़ियों के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया. इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्रवाल को फटकार भी लगाई दी. जिसके बाद अग्रवाल ने सदन में माफ़ी मांगी थी. हालांकि इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है.
अग्रवाल के मंत्री पद से इस्तीफे की चर्चाएं तब तेज हो गई थी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तरकाशी दौरे पर उत्तराखंड आए थे. पीएम के दौरे के दौरान उत्तरकाशी के प्रभारी मंत्री होने के बावजूद भी अग्रवाल पूरे कार्यक्रम में नजर नहीं आए थे. जिसके बाद से ही अग्रवाल के मंत्री पद से छुट्टी की चर्चाएं तेज हो गई थी.
प्रेमचंद अग्रवाल का राजनीतिक सफर
प्रेमचंद अगरवाक ने विद्यार्थी परिषद से लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े रहे. अग्रवाल युवावस्था से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे. ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र से 2007 में प्रेमचंद अग्रवाल ने पहला चुनाव जीता था. 2007 के विधानसभा चुनाव के बाद से वह लगातार तीन बार ऋषिकेश से विधायक रहे हैं.