भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली हुई और सेंसेक्स 1,153 अंक से ज्यादा टूट गया। निवेशकों के करीब 8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
Indian Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर को ऐसा बिकवाली का दौर चला कि दोपहर तक निवेशकों के बीच खलबली मच गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली और इसका असर मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों पर तो और भी ज्यादा दिखाई दिया। बाजार में इस भारी गिरावट की वजह से निवेशकों करीब 8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गया।
दोपहर 2:15 बजे तक BSE Sensex 1,153.86 अंक यानी 1.59 फीसदी टूटकर 71,484.84 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स 72,668 पर खुला था और दिन में 72,693.97 का ऊपरी स्तर भी छुआ, लेकिन इसके बाद बिकवाली इतनी तेज हुई कि इंडेक्स 71,406.79 तक फिसल गया। उधर NSE Nifty भी दबाव में रहा। निफ्टी 399.85 अंक यानी 1.77 फीसदी गिरकर 22,203.20 पर पहुंच गया। निफ्टी 22,599.05 पर खुला था और कारोबार के दौरान 22,190 तक नीचे चला गया।
सिर्फ बड़े शेयर नहीं, छोटे शेयरों में भी हाहाकार
बाजार की गिरावट सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो इससे भी ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। Nifty Midcap 100 में 2.36 फीसदी की गिरावट आई। Nifty Smallcap 50 करीब 2.35 फीसदी टूटा, जबकि Nifty Smallcap 250 में 2.25 फीसदी और Nifty Smallcap 500 में 2.33 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। Nifty Microcap 250 भी 2.58 फीसदी फिसल गया। यानी बाजार में बड़े शेयरों से लेकर छोटे शेयरों तक बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
आखिर क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?
बाजार की इस तेज गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। RBI का सख्त रुख, 102 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और दुनियाभर के कमजोर बाजारों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
1. RBI के सख्त रुख से निवेशकों की चिंता बढ़ी
बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू झटका RBI की बुधवार को हुई मौद्रिक नीति बैठक से आया। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है।
सिर्फ ब्याज दर बढ़ाना ही चिंता की वजह नहीं है। RBI ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि महंगाई और अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए आगे भी ब्याज दरों पर सख्ती की गुंजाइश बनी हुई है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया कि फिलहाल जल्द ब्याज दर घटाने की संभावना नहीं है। आगे फैसला दरों को स्थिर रखने या फिर बढ़ाने की दिशा में हो सकता है।
इससे निवेशकों को डर है कि कंपनियों के लिए कर्ज महंगा रह सकता है, जिसका असर कंपनियों की कमाई, लोगों के खर्च और शेयरों की वैल्यूएशन पर पड़ सकता है।
2. कच्चा तेल 102 डॉलर के पार, महंगाई की चिंता बढ़ी
दूसरी बड़ी परेशानी कच्चे तेल की कीमत है। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों के कारण सप्लाई में रुकावट और शिपिंग लागत बढ़ने की चिंता बनी हुई है।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल बड़ी चुनौती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा महंगे तेल से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। RBI पहले ही वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ा चुका है।
3. डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर
शेयर बाजार पर रुपये की कमजोरी का भी दबाव है। बुधवार को भारतीय रुपया करीब 96.75 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हुआ था।
खास बात यह है कि RBI की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने के बावजूद रुपये पर दबाव बना रहा। डॉलर की मजबूत मांग, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को इसके पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है।
रुपया कमजोर होने का मतलब है कि भारत के लिए कच्चा तेल और दूसरी आयातित चीजें महंगी हो सकती हैं। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और RBI के सामने भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
4. विदेशी निवेशकों ने जमकर शेयर बेचे
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की हालत खराब कर दी है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में 6,121.37 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले।
जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं तो बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है। फिलहाल अमेरिका में बॉन्ड यील्ड ऊंची है और डॉलर भी मजबूत बना हुआ है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों में पैसा लगाने को लेकर ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं।
5. दुनिया के बाजारों का मूड भी खराब
भारतीय बाजार को वैश्विक बाजारों से भी कोई खास सहारा नहीं मिला। गुरुवार को एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुआ था।
अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड बढ़ने और फेडरल रिजर्व की ओर से आगे ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। यानी भारत में बाजार पर दबाव सिर्फ घरेलू कारणों से नहीं है, बल्कि वैश्विक माहौल भी निवेशकों के पक्ष में नहीं दिख रहा।
India VIX में भी तेज उछाल
बाजार में डर और अस्थिरता का अंदाजा India VIX से भी लगाया जा सकता है। India VIX में 8.44 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई और यह 15.06 पर पहुंच गया।
VIX में तेजी का मतलब बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की चिंता बढ़ना है। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर ज्यादा सावधानी के साथ कारोबार करते हैं।
मेटल, ऑयल और रियल्टी शेयर सबसे ज्यादा दबाव में
बाजार की गिरावट में कई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए। Nifty Metal इंडेक्स 3.22 फीसदी टूटकर सबसे ज्यादा गिरने वाले प्रमुख सेक्टरों में रहा।
इसके अलावा Nifty Oil & Gas में 2.66 फीसदी, Nifty Realty में 2.41 फीसदी, Nifty Healthcare में 2.18 फीसदी और Nifty Pharma में 2.07 फीसदी की गिरावट आई।
Nifty Auto 1.69 फीसदी, Nifty FMCG 1.64 फीसदी, Nifty Cement 1.61 फीसदी, Nifty Financial Services ex-Bank 1.51 फीसदी और Nifty MidSmall Financial Services 1.46 फीसदी नीचे रहा।
IT शेयरों ने बाजार के खिलाफ दिखाई मजबूती
जहां ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में नजर आए, वहीं IT शेयरों ने बाजार के इस ट्रेंड के खिलाफ प्रदर्शन किया। Nifty IT इंडेक्स 0.71 फीसदी की बढ़त में रहा।
Sensex के प्रमुख IT शेयरों में TCS 0.87 फीसदी, Tech Mahindra 0.76 फीसदी, Infosys 0.69 फीसदी और HCLTech 0.65 फीसदी ऊपर रहे।
TCS का शेयर खास तौर पर चर्चा में है, क्योंकि कंपनी सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली है। Reuters के मुताबिक, विश्लेषकों को उम्मीद है कि TCS का तिमाही राजस्व सालाना आधार पर 11.2 फीसदी और मुनाफा 14.2 फीसदी बढ़ सकता है।
फिलहाल बाजार पर चारों तरफ से दबाव
कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार पर इस समय कई मोर्चों से दबाव बना हुआ है। RBI का सख्त रुख, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक माहौल ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया है।
यही वजह है कि गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार की नजर अब आगे महंगाई, कच्चे तेल, रुपये और विदेशी निवेशकों के रुख पर रहेगी।

