अपनी संस्कृति से जुड़े अधिकारी लोगों के अधिक नजदीक होते हैं। एसडीएम चौहान इसके सबसे अच्छे उदाहरण

रामनगर the misaile

रामनगर के सरस मेले में उमड़ी जनता की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि हमारी लोक संस्कृति,हस्तशिल्प,स्थानीय उत्पाद और लोक कलाकार आज भी लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं।

ऐसे मेले केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि स्थानीय कारीगरों,स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को अपनी प्रतिभा और उत्पादों को पहचान दिलाने का सशक्त मंच भी प्रदान करते हैं।


इस अवसर पर उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान का प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर जनता के बीच सहज रूप से उपस्थित रहना और स्थानीय संस्कृति से जुड़कर जोनसारी गीत पर नृत्य करना भी एक सकारात्मक संदेश देता है। ऐसे लोग अपनी मिट्टी से जुड़े हुए होते हैं। उनका जौनसारी लोक गीत पर नृत्य करना उनका अपनी संस्कृति लगाड दर्शाता है।

संस्कृति से ओतपोत जौनसारी लोक गीत पर नृत्य करते एसडीएम

जब कोई अधिकारी अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति का सम्मान करता है और जनता के साथ आत्मीयता से जुड़ता है, तो प्रशासन और समाज के बीच विश्वास और अपनापन और अधिक मजबूत होता है ।

उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करता हूँ।


साथ ही, मैं उत्तराखंड सरकार कि ऐसे जनहितैषी, संस्कृति-प्रेमी और जनता से आत्मीय रूप से जुड़े अधिकारियों को सम्मानित किया जाए। इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा,बल्कि अन्य अधिकारियों को भी जनता के बीच रहकर अपनी जिम्मेदारियों का बेहतर निर्वहन करने तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और सम्मान के लिए प्रेरणा एवं जागरूकता मिलेगी। हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। जो अधिकारी अपनी संस्कृति और जनता का सम्मान करते हैं, वे वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं।

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