नगर निगम में भाजपा के भीतर चल रहा अंदरूनी संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है।
नगर निगम में भाजपा के भीतर चल रहा अंदरूनी संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कथित भ्रष्टाचार और कायाकल्प योजना के तहत हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पार्टी में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश संगठन तक पहुंच गया है। खबर मध्य प्रदेश के मुरैना से है
नगर निगम की महापौर शारदा सोलंकी के खिलाफ भाजपा के 11 पार्षदों और उनके परिजनों ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने अपनी शिकायत लेकर विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की है। वहीं दूसरी ओर, महापौर भी ग्वालियर स्थित विधानसभा अध्यक्ष के सरकारी बंगले पर पहुंचीं, जहां उनसे शाम छह बजे के बाद मुलाकात का समय तय किया गया।
सूत्रों के अनुसार, पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम में कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती है तो वे आंदोलन और धरना देने के लिए बाध्य होंगे। वहीं, महापौर ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
बताया जा रहा है कि सुबह के समय भाजपा के 11 पार्षद और उनके परिजन ग्वालियर स्थित विधानसभा अध्यक्ष के बंगले पर पहुंचे थे। इसके बाद महापौर भी वहां पहुंचीं, लेकिन मुलाकात का समय अलग-अलग निर्धारित किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर गुटबाजी और असंतोष की तस्वीर को और स्पष्ट कर दिया है।
इधर, बीते दिन महापौर द्वारा एमआईसी भंग किए जाने के फैसले के बाद पार्षदों की नाराजगी और बढ़ गई है। वहीं पार्षदों की ओर से यह भी संकेत दिए जा रहे हैं कि यदि समाधान नहीं निकला तो वे मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए भोपाल का रुख कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महापौर शारदा सोलंकी ने कहा कि उन्होंने अपनी बात पार्टी संगठन और प्रदेश नेतृत्व के समक्ष रख दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित वीडियो और जानकारी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को भेजी जा चुकी है। इस पूरे घटनाक्रम ने मुरैना नगर निगम की राजनीति को गर्मा दिया है और अब सभी की नजरें प्रदेश नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
