सागर जिले के खुरई में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नाबालिग किशोरी का अपहरण कर उसके साथ तीन महीने तक सामूहिक दुष्कर्म करने वाले पाखंडी कथावाचक और उसके साथी ढोलक वादक को जीवनकाल के अंतिम समय तक जेल में रहने की कठोर सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायालय द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनाया गया।
कथा के बहाने बुना था जाल: यह है पूरा मामला
यह सनसनीखेज मामला खुरई के मालथौन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव का है। लोक अभियोजक बलवीर सिंह ठाकुर ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि करीब डेढ़ साल पहले फरवरी 2025 में गांव में एक धार्मिक कथा का आयोजन किया गया था। कथा कराने के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी से कथावाचक गोविंद दास उर्फ गोविंदा आया था, जबकि उसका साथी राधे (टीकमगढ़) कथा में ढोलक बजाने का काम करता था। कथा के दौरान ही दोनों आरोपियों ने कथा सुनने आई 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को अपनी बातों के जाल में फंसाना शुरू कर दिया। शातिर आरोपियों ने किशोरी की बहन को ढोलक वादक की सोशल मीडिया आईडी दी, जिसके जरिए वे किशोरी से संपर्क में रहने लगे।
घर से जेवर मंगाए, फिर ओरछा-ललितपुर में बनाकर रखा बंधक
13 फरवरी 2025 की रात दोनों आरोपी बाइक से किशोरी के घर के पास पहुंचे। उन्होंने किशोरी को फोन कर मां के जेवर साथ लेकर आने का लालच दिया। जब किशोरी दो जोड़ी पायल लेकर उनके पास पहुंची, तो दोनों आरोपियों ने उसे जबरदस्ती बाइक पर बैठाया और ओरछा ले गए। आरोपियों ने किशोरी को पहले ओरछा के एक होटल में रखा। इसके बाद वे उसे ललितपुर (उ.प्र.) ले गए, जहां एक कमरा किराए पर लेकर किशोरी को दो महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान शादी का झांसा देकर दोनों उसके साथ लगातार सामूहिक दुष्कर्म करते रहे।
पहचान छिपाने के लिए भरी थी मांग
ललितपुर के बाद आरोपी किशोरी को झांसी के पास भोजला गांव लेकर पहुंचे। वहां मकान मालिक को कोई शक न हो और कमरा आसानी से मिल सके, इसके लिए आरोपियों ने जबरन किशोरी की मांग भरवाकर उसे चूड़ियां पहना दी थीं। इसी बीच एक दिन मौका पाकर पीड़ित किशोरी ने चुपके से अपने पिता को फोन लगाया और अपनी आपबीती सुनाई। पिता की सूचना पर सक्रिय हुई मालथौन पुलिस ने तत्काल दबिश देकर किशोरी को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया और दोनों को झांसी से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दोनों आरोपी 3 जून 2025 से खुरई उपजेल में बंद हैं।न्यायालय का कड़ा रुख
तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संध्या मनोज श्रीवास्तव की कोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 702(2) में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास, जिसका अर्थ दोषी के शेष प्राकृतिक जीवनकाल के अंत तक जेल में रहना है। साथ ही 2-2 हजार रुपये का अर्थदंड। वहीं पॉक्सो एक्ट (धारा 5L/6): 20-20 साल का कठोर कारावास और 2-2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। धारा 96: 7-7 साल का कठोर कारावास और 1-1 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।


