Monsoon Update 2026 : इन दिनों देश में भंयकर गर्मी पड़ रही है। दक्षिण-पश्चिम तक मानसून पहुंच चुका है लेकिन उत्तर भारत के लोगों को अभी तक मानसून का इंतजार है। मौसम विभाग ने मानसून को लेकर ऐसी भविष्यवाणी की है कि जो डराने वाली है। मौसम विभाग ने 2026 के मानसून पूर्वानुमान को लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए का 90 प्रतिशत कर दिया है। यदि यह भविष्यवाणी सच होती है तो साल 20215 के बाद 2026 सबसे सूखा वाला मानसून बनने वाला है।
देश पर मंडरा रहा है सुपर-अल नीनो का खतरा
मौसम विभाग की माने तो प्रशांत महासागर में बन रहा ‘अल नीनो’ अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो हो सकता है। इसे मौसम वैज्ञानिकों ने फिल्मों से लिया गया एक निकनेम ‘गॉडजिला अल नीनो’ भी दे दिया है। प्रशांत महासागर में यह पानी का वह हिस्सा है, जिस पर वैज्ञानिक सबसे ज्यादा नजर रखते हैं। जिस तापमान पर अल-नीनो बनता है, यहां का पानी उस तापमान से भी ऊपर जा चुका है।
यूरोपी मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर के पानी का तापमान अभी और बढ़ेगा। ग्लोबल क्लाइमेट एजेंसियों ने अब आधिकारिक तौर पर अल नीनो की शुरुआत की घोषणा कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि सितंबर तक इसके हालात और मजबूत हो जायेंगे।
IMD के अनुसार 2015 में मानसून था सबसे कमजोर
मौसम विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में मानसून बहुत कमजोर था। 2015 में जून से सितंबर के चार महीनों में कुल बारिश एलपीए का केवल 86 प्रतिशत थी। इससे 2014 और 2015 लगातार दो साल कम बारिश वाले साल बन गए थे। मौसम विभाग के 115 साल के रिकॉर्ड में ऐसा केवल चौथी बार हुआ था।
इससे पहले 1904 और 1905 में ऐसा हुआ था. फिर 1965 और 1966 में भी सूखे जैसे हालात बने थे। इसके बाद 1986 और 1987 में भी लगातार दो साल कम बारिश हुई थी। अब 2026 में भी सूखे का डर सता रहा है।
भारत के 60 प्रतिशत किसान अपनी गर्मियों की फसलों के लिए इसी बारिश पर निर्भर हैं। कमजोर मानसून का असर सबसे पहले मिट्टी पर और उसके तुरंत बाद खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दिखता है।
देश में आज भी खाने-पीने की चीजों की कीमत बारिश से तय होती है। बारिश बेहतर होगी तो फसलों को सही मात्रा में पानी मिलेगा और देश में खाने-पीने की चीजें सही मात्रा में उपलब्ध हो सकेंगी।
