दिल्ली में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत के बाद परीक्षा के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है। शुरुआती जांच में छात्रा के तनाव में होने की बात सामने आई है। इस बीच NEET री-एग्जाम, NTA की तैयारियां और टेलीग्राम विवाद भी चर्चा में हैं।
New Delhi: दिल्ली के पालम इलाके में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार छात्रा ने हाल ही में NEET परीक्षा दी थी और पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव का सामना कर रही थी।
घर में अकेली थी छात्रा
पुलिस के अनुसार 13 जून को छात्रा के पिता पारिवारिक कारणों से घर से बाहर गए हुए थे। घटना के समय छात्रा घर पर अकेली थी। बाद में पुलिस को एक नोट मिला, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए खुद को उनकी अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाने की बात लिखी थी। परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला बताया जा रहा है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहे मामले
हाल के दिनों में राजस्थान के सीकर और उत्तराखंड के देहरादून से भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की मौत के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं ने छात्रों के बीच बढ़ते तनाव, असफलता के डर और सामाजिक अपेक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NEET री-एग्जाम और बढ़ी संवेदनशीलता
इस बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) 21 जून को NEET UG री-एग्जाम कराने जा रही है। NTA ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
टेलीग्राम विवाद भी चर्चा में
री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया, जबकि कंपनी ने इस निर्णय को चुनौती दी है।
मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में तनाव, चिंता और असफलता का डर तेजी से बढ़ रहा है। कई बार छात्र अपनी परेशानियों को परिवार या दोस्तों से साझा नहीं कर पाते, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी छात्र में लगातार उदासी, निराशा, पढ़ाई में रुचि कम होना, नींद की समस्या या भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंता जैसे संकेत दिखाई दें तो उसे तुरंत भावनात्मक और पेशेवर सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, अवसाद या भावनात्मक संकट से गुजर रहा है, तो मदद उपलब्ध है। भारत सरकार की Tele-MANAS मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 या 1-800-891-4416 पर 24 घंटे संपर्क किया जा सकता है। प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ गोपनीय परामर्श प्रदान करते हैं। आपात स्थिति में 112 पर संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत सहायता लें।
