HC का बड़ा फैसला, गिरधारी लाल साहू के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से किया इनकार

Minister Rekha Arya revealed the secret hideouts of 'Pappu Girdhari' to the SIT.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गिरधारी लाल साहू द्वारा दायर की गई रिट याचिका को खारिज कर दिया है. याचिका में थाना केदार/कैंट, जिला देहरादून में कैबिनेट मंत्री और उनकी पत्नी रेखा आर्या द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी.

नक्शेदेखें

HC ने किया गिरधारी लाल साहू के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार

गिरधारी लाल साहू ने एफआईआर के खिलाफ रिट याचिका दाखिल की थी. इस मामले में रेखा आर्या ने गिरधारी लाल साहू पर आईपीसी की धाराओं 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504, 506 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1) के तहत गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था. याची के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि दोनों पक्षों की शादी 06 जुलाई 2004 को हुई थी. लगभग 22 वर्षों से वे साथ रह रहे हैं. इसलिए यह केवल घरेलू विवाद का मामला है जिसे अब आपराधिक रंग दिया जा रहा है.

रेखा आर्य ने पति पर लगाए थे गंभीर आरोप

रेखा आर्या ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि शादी के वक्त उनसे गिरधारी द्वारा पहली शादी और बच्चों की बात छिपाई गई थी. बाद में अन्य महिलाओं से अवैध संबंध रखने और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज व जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां की गईं. इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने फर्जी हस्ताक्षर कर और दस्तावेज तैयार कर उन्हें कंपनी के निदेशक पद से जबरन सेवानिवृत्त दिखा दिया, जबकि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया था.

गिरधारी लाल पर हत्या की साजिश का आरोप है. रेखा आर्या ने शिकायत में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया है जिसमें कथित तौर पर साहू द्वारा उन्हें रास्ते से हटाने (कत्ल करने) की साजिश रचने और इसके लिए पैसे खर्च करने की बात सामने आई थी. राज्य के सरकारी वकील और रेखा आर्या के वकील ने इन गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए याचिका का कड़ा विरोध किया और कहा कि याची जांच में सहयोग भी नहीं कर रहा है.

HC ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति आलोक महरा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि इस मामले के आरोप केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूट रचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया शामिल हैं.

अदालत ने कहा कि 22 साल का पुराना रिश्ता होने मात्र से बाद में होने वाले अपराधों या क्रूरता की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता और ऑडियो रिकॉर्डिंग व फर्जी दस्तावेजों की सत्यता जांच और विचारण का विषय है. FIR को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और यह रिट याचिका खारिज की जाती है.

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