
हल्द्वानी। सरकारी नियमों की आड़ में गौला नदी के खनन गेटों से इन दिनों ओवरलोडिंग का खुला खेल चल रहा है। रेता बजरी (आरबीएम) से लदे बसैकड़ों वाहन तथ मानकों से अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं. जिससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। गौला के 11 मेहीं पर करीश 7500 डंपर खनन के लिए रजिस्टर हैं। 25 मार्च को इन डंपरों में से करीब 2744 (एक तिहाई से ज्यादा) ओवरलोड लेकर निकले जिसके चलते इनकी अगले दिन की निकासी बंद कर दी गई। वहीं 27 मार्च को करीब 627 वाहनों ने ओवर लोड के साथ निकासी की।यहीं हैरानी की बात यह है कि हजारों वाहन ओवर लोडिंग कर रहे हैं वहीं परिवहन विभाग कुछ वाहन पकड़ कर अपनी पीठ थपथपा रहा है। नीति में ही कर दिवा खेलहल्द्वानी और लालकुआं क्षेत्र के 11 बनन गेटों से निकलने वाले वाहनों के लिए विभाग ने एक नीति बनाई है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई वाहन ऑवरलीड पकड़ा जाता है तो उस पर भारी जुर्माने लगाने के बजाय केवल एक दिन की निकासी (नंबर) बंद करने का प्रावधान है। अगले दिन अगर जयकारा पड़ जाए तो कार्रवाई से कोई पार्क ही नहीं पड़ता है। अवकारा के बाद फिर से निकासी शुरू हो जाती है। खनन कारोबारी और वाहन स्वामी इसी नीति का फायदा उठा रहे हैं। एक दिन का काम बंद होने के डर के बदले वे क्षमता से कई गुना अधिक माल भरकर अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं। विभागों की भूमिका पर सवालनियमों की इस कमजोरी ने प्रवर्तन एजेंसियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। वन विभाग के खनन क्षेत्रों में तैनात उड़नदस्तों की सक्रियता शून्य होने से ओवरलोडिंग कर रहे वाहन मालिकों के हौसले बुलंद हैं। ओवरलोड दौड़ रहे खानन वाहनों पर कार्रवाई के लिए टीम गठित की गई है। अन्य विभागों के साथ सामंजस्य बनाकर ओवरलोडिंग रोकने को कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। अरविंद पांडे, आरटीओ (प्रवर्तन) ओवरलोड वाहनों से खनन गेट पर जाम लग रहा था। जिसके चलते ओवरलोड वाहनों की एक दिन की निकासी बंद की जा रही है। जानबूझकर ओवरलोडिंग कर व्यवस्था बिगाड़ रहे चालकों पर परिवहन विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। नवीन सिंह, जिता खान अधिकारी


