
उत्तराखंड की हर्षिल घाटी अब बड़े खतरे की जद में है। भागीरथी नदी ने अपना रुख बदल दिया है। जिसकी वजह से अब हर्षिल और उसके आस पास की बस्तियों पर बड़ी तबाही का साया मंडराने लगा है।
बड़े खतरे की जद में है हर्षिल घाटी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गंगोत्री हाइवे पर बसी हर्षिल घाटी आज एक बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ी है। भागरीथी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते पूरी हर्षिल घाटी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इसी के साथ प्रशासन के सुरक्षा के दावों की भी पोल खुलती नजर आ रही है।
पिछले साल हर्षिल घाटी में आई थी बड़ी आपदा
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब हर्षिल घाटी खतरे में हो। पिछले साल भी हर्षिल घाटी में एक बड़ी आपदा आई थी। धराली गांव में बादल फटने की वजह से खीर गंगा नदी ने चंद सेकंडों में अपना रौद्र रुप दिखाया था। अपने रास्ते में आने वाले सभी चीजों को खीर गंगा निगल गई थी। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई थी। कई लोगों के शव भी उनके घर वालों को नसीब नहीं हुए। उस वक्त भी हर्षिल घाटी को काफी नुकसान हुआ था।
हुई थी भारी तबाही
हर्षिल के ऊपर स्थित तेलगाड़ कैचमेंट में अचानक मलबा बोल्डर और पेड़ तेज बहाव के साथ नीचे की तरफ आ गए थे। इस बहाव ने सबसे पहले सेना के कैंप को अपनी चपेट में लिया। जिसमें कई जवान लापता हो गए थे। यहां तक की कैंप को भी भारी नुकसान हुआ था।
भागीरथी नदी में जमा हो गया था मलबा
जिसके बाद ये मलबा भागीरथी नदी में जाकर जमा हो गया। जिसके चलते नदी का तल ऊंचा हो गया और हर्षिल और धराली के बीच पानी रुकने लगा। जिससे एक अस्थायी झील बन गई। इस मलबे ने भागीरथी के असल स्वरुप को भी काफी प्रभावित किया। लिहाजा भागीरथी का रुख भी बदल गया है।
हर्षिल की हालिया सैटेलाइट तस्वीरें चौंकाने वाली
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक हर्षिल की हालिया सैटेलाइट तस्वीरें चौंकाने वाली हैं। अमुमन पहाड़ी नदियां गहरी और संकरी धारा में बहती हैं। लेकिन इस सैटेलाइट तस्विरों में दिख रहा है कि भागीरथी कई जगह चौड़ी होकर फैल रही है। जिसका मतलब साफ है कि भागीरथी के तल में भारी मलबा जमा है। भागीरथी नदी के किनारे पंखेनुमा मलबे के ढेर भी दिख रहे हैं जिन्हें भूवैज्ञानिक डेब्रिस फैन कहते हैं।

इसका मतलब है कि ऊपर से आए पत्थर और मिट्टी एक जगह जमा होकर नदी की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में तेज बहाव आने पर नदी अचानक किनारे की ओर दबाव बनाना शुरू कर सकती है।
अस्थायी टीला भी नहीं आया काम
हालांकि वहीं प्रशासन ने भागीरथी नदी के बहाव को काबू में करने के लिए मलबे का एक अस्थायी टीला बनाया था। उम्मीद थी कि ये टीला तेज वेग की ढाल बनेगा और भागीरथी नदी घाटी की तरफ नहीं आएगी। लेकिन भागीरथी नदी के वेग से ये टिला भी बह गया। अब भागीरथी का वेग सीधे हर्षिल के घरों बगीचों और सरकारी इमारतों की तरफ जा रहा है।
आपदा से प्रशासन ने नहीं लिया कोई सबक
यहां तक की GMVN गेस्ट हाउस का टिनशेड भी भागीरथी की लहरों में समा गया है। हर्षिल थान सेना का कैंप और कई रिहायशी मकान भी अब भागीरथी नदी के भूकटाव की जद में आ गए हैं। धराली की इस आपदा को 11 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि उस आपदा से प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। आज एक बार फिर हर्षिल की बस्तियां दांव पर हैं। पूरी घाटी पर भू-कटाव का खतरा मंडरा रहा है। पेड़ उखड़कर गिर रहे हैं, मिट्टी धंस रही है और नदी पूरे वेग में है।
स्थानीय लोग खौफ में
मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि इससे स्थानीय लोग खौफ में हैं। इसे लेकर प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं। हर्षिल के स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने नदी को चैनलाइज करने के नाम पर खानापूर्ति की और दिखावे के लिए नदी के बीचों-बीच मलबे का टीला खड़ा कर दिया था। जो पहली बारिश से पहले ही बह गया।
नहीं बनी कोई योजना तो हर्षिल घाटी को बचाना नामुमकिन!
पिछले साल बनी झील को अब तक पूरी तरह साफ नहीं किया गया। ना कोई ठोस योजना इसे लेकर बनाई गई है। ना ही इसका कोई स्थायी समाधान किया जा रहा है। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। हालात ये है कि सैकड़ों ऐकड़ के सेब के बगीचे, लोगों के घर, रिहायशी इलाके सब कुछ नदी के रास्ते में है। अगर इस मानसून बारीश तेज हुई या यहां बादल फटा तो हर्षिल घाटी को बचाना नामुमकिन हो जाएगा।